भारत और कनाडा ने उर्वरक क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का संकल्प दोहराया
नई दिल्ली: केंद्रीय उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा ने नई दिल्ली में कनाडा के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। बैठक में उर्वरक क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने और दीर्घकालिक खाद्य व कृषि सुरक्षा के लिए भारत-कनाडा की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की साझा प्रतिबद्धता पर जोर दिया गया। दोनों पक्षों ने कहा कि इससे आर्थिक सहयोग को गति मिलेगी और उर्वरक क्षेत्र में पारस्परिक लाभ वाले निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
कनाडाई प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कनाडा के प्राकृतिक संसाधन मंत्री टिम हौडसन ने किया। बैठक के दौरान नड्डा ने कहा कि भारत में पोटाश की उपलब्धता मजबूत करना मृदा उर्वरता बहाल करने और एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन के तहत संतुलित पोषण उपयोग बढ़ाने के लिए अहम है। उन्होंने म्यूरेट ऑफ पोटाश (MOP) के भरोसेमंद आपूर्तिकर्ता के रूप में कनाडा की भूमिका की सराहना की।
नड्डा ने बताया कि भारत अपनी कुल MOP जरूरत का करीब 25% कनाडा से आयात करता है। उन्होंने गुजरात स्टेट फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स लिमिटेड (GSFC) द्वारा कनाडा की पोटाश विकास कंपनी कार्नालाइट रिसोर्सेज इंक में 49.68 मिलियन कनाडाई डॉलर के निवेश का उल्लेख किया। वर्तमान में इस परियोजना में GSFC की 47.73% हिस्सेदारी बताई गई, जिसे भारत के लिए रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
वहीं टिम हौडसन ने भारत की कृषि उत्पादकता को समर्थन देने के लिए कनाडा की प्रतिबद्धता दोहराई और कहा कि पोटाश कृषि के लिए एक महत्वपूर्ण खनिज है। उन्होंने कनाडा के नए निवेश वातावरण की जानकारी देते हुए कहा कि प्राकृतिक संसाधन क्षेत्र में भारतीय साझेदारों के निवेश के अनुरूप कनाडा सरकार भी निवेश करने को तैयार है।
बैठक में भारत की पोटाश सुरक्षा से जुड़ी दीर्घकालिक रणनीति पर भी चर्चा हुई। इसमें खनन व अन्वेषण में तकनीकी सहयोग के अवसरों के साथ-साथ MOP के लिए कनाडा के साथ दीर्घकालिक आपूर्ति समझौतों में भारत की रुचि भी शामिल रही।

