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ट्रंप की चेतावनी के बाद ईरान का जवाब: अमेरिकी हमला हुआ तो इज़रायल बनेगा निशाना

वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौते को लेकर चल रही कोशिशें फिलहाल आगे नहीं बढ़ पाई हैं। वॉशिंगटन की ओर से ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सख्त शर्तों और बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता से जुड़ी पाबंदियों जैसे मुद्दों पर दबाव बना हुआ है, जबकि तेहरान “बराबरी और बिना दबाव” के आधार पर ही बातचीत की बात कह रहा है।

इसी बीच 28 जनवरी 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी कि ईरान अगर “नो न्यूक्लियर वेपन” वाली डील के लिए जल्द टेबल पर नहीं आता, तो अमेरिकी कार्रवाई पहले से ज्यादा कठोर हो सकती है। ट्रंप ने यह भी कहा कि USS Abraham Lincoln की अगुवाई में अमेरिकी नौसैनिक ताकत (“आर्मडा”) क्षेत्र की ओर बढ़ रही है।

ट्रंप के बयान पर ईरान ने कड़ा पलटवार किया। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के सलाहकार अली शमखानी ने संकेत दिया कि अगर अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई की, तो ईरान अमेरिकी हितों के साथ-साथ इज़रायल और उसके समर्थकों को भी निशाना बना सकता है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराक़ची ने भी कहा कि ईरानी सशस्त्र बल किसी भी “आक्रामक कार्रवाई” का तुरंत और ताकतवर जवाब देने के लिए तैयार हैं—हालांकि उन्होंने यह भी दोहराया कि ईरान एक “निष्पक्ष” परमाणु डील के लिए बातचीत से इनकार नहीं करता।

तनाव की पृष्ठभूमि में ईरान के भीतर हाल के हफ्तों में हुए विरोध-प्रदर्शनों पर कार्रवाई का मुद्दा भी प्रमुख है। विभिन्न मानवाधिकार समूहों और आधिकारिक बयानों में हताहतों/गिरफ्तारियों के आंकड़े अलग-अलग बताए गए हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि आसान नहीं बताई जा रही।

अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स/सूत्रों के हवाले से यह भी कहा गया है कि व्हाइट हाउस के भीतर कई सैन्य विकल्पों पर विचार चल रहा है—जिनमें ईरान के सुरक्षा ढांचे, शीर्ष जिम्मेदारों और कुछ रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाने जैसी संभावनाएं शामिल हैं। हालांकि, रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रंप ने अभी अंतिम फैसला नहीं लिया है।

उधर, जून 2025 में ईरान के तीन परमाणु ठिकानों पर हुए हमलों का हवाला भी मौजूदा बयानबाजी में बार-बार आ रहा है—और इसी तुलना के जरिए “अगली कार्रवाई” को ज्यादा बड़ा बताया जा रहा है।

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